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PCOD का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपचार: 13 से 40 साल की महिलाओं को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है पीसीओडी का खतरा
पीसीओà¤à¤¸ (PCOS) महिलाओं से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कई à¤à¤¸à¥€ समसà¥â€à¤¯à¤¾ है, जिसका पता देर से चलता है। महिलाà¤à¤‚ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में होने वाले कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को नजरअंदाज करती है, जिसके कारण उमà¥à¤° बà¥à¤¤à¥‡-बà¥à¤¤à¥‡ यह लकà¥à¤·à¤£ पीसीओडी/पीसीओà¤à¤¸ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो जाती है। जो उनके लिठघातक सिदà¥à¤§ होती है। आज हम इस लेख में जानेंगे कि पीसीओà¤à¤¸ या पीसीओडी कà¥â€à¤¯à¤¾ है, पीसीओडी में कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिà¤, योग में PCOD समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान कà¥â€à¤¯à¤¾ है। तो आइठजानते हैं आशा आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾ कà¥â€à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤• की आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° चंचल शरà¥à¤®à¤¾ से पीसीओडी के आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपचार (ayurvedic treatment of pcod or pcos in hindi) के बारे में।
पीसीओà¤à¤¸ या पीसीओडी कौन सी बीमारी है?
पॉली सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (PCOS) या पॉली सिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी डिसऑरà¥à¤¡à¤° (PCOD) à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ मेडिकल कंडिशन है, जिसमें महिलाओं में खासकर उनके पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ काल में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ असंतà¥à¤²à¤¨ (Hormonal imbalance) देखने को मिलता है। इसमें महिला के शरीर में male हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ 'à¤à¤‚डà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨' का लेवल बॠजाता है और ओवरीज पर à¤à¤• से अधिक सिसà¥à¤Ÿ हो जाते हैं। यह समसà¥à¤¯à¤¾ आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक रूप से à¤à¥€ हो सकती है और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वज़न होने पर à¤à¥€ इसके होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बॠजाती है। अधिक तनावपूरà¥à¤£ जिंदगी à¤à¥€ इसका à¤à¤• मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण हो सकता है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ 13 से 40 वरà¥à¤· की आयॠकी महिलाओं में पाया जाता है।
पीसीओडी/पीसीओà¤à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£
अनियमित मासिक धरà¥à¤®
बालों का à¤à¥œà¤¨à¤¾
शरीर और चेहरे पर ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हेयर गà¥à¤°à¥‹à¤¥
पेडू में दरà¥à¤¦
मà¥à¤‚हासे
सिर दरà¥à¤¦
नींद की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ और मूड सà¥à¤µà¤¿à¤‚ग आदि शामिल हैं
वज़न बà¥à¤¨à¤¾ आदि।
पीसीओडी/पीसीओà¤à¤¸ से बचाव के कà¥à¤› आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• नà¥à¤¸à¥à¤–े-Pcos ayurvedic treatment
1. योग
पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤®: जब आप नियमित रूप से पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करते है तो आप अपनी पà¥à¤°à¤¾à¤£ वायॠका संचालन शरीर के सà¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में करते है और शरीर में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ रहती है।
कपालà¤à¤¾à¤¤à¤¿: यह चयापचय पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को बà¥à¤¾à¤¤à¤¾ है और वज़न कम करने में मदद करता है। नाड़ियों का शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤•रण करता है। पेट की मासपेशियों को सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ करता है, पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को अचà¥à¤›à¤¾ करता है और पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का शरीर में संचरण करता है। मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और तांतà¥à¤°à¤¿à¤• तंतà¥à¤° को ऊरà¥à¤œà¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
सूरà¥à¤¯ नमसà¥à¤•ार: सूरà¥à¤¯ नमसà¥à¤•ार करने से शरीर के हर हिसà¥à¤¸à¥‡ को फायदा होता है रोज़ाना पिछले दिन से à¤à¤• बार अधिक दोहराठऔर जब आप बारहवीं बार तक पहà¥à¤à¤š जाये तो रोज़ाना 12 बार दोहराà¤à¤‚।
शवासन: रात को सोने के समय 2 से 3 मिनट तक शवासन करें जिससे आपको तनाव से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ होगी और नींद अचà¥à¤›à¥€ आà¤à¤—ी।
2. वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®:
रोज़ाना कम से कम आधे घंटे सैर करें जिससे आपका शरीर सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहता है, और मूड à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ रहता है।
3. à¤à¤• साथ दो काम न करें:
à¤à¤• समय में à¤à¤• ही काम करें अथवा जब à¤à¤• काम ख़तà¥à¤® हो जाठतà¤à¥€ दूसरा काम करें जिससे आपके शरीर के सेलà¥à¤¸ नियमित रूप से काम करेंगे।
4. डाइट:
आपको हरी सबà¥à¥›à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और देसी गाय के दूध का सेवन करना चाहिठजिससे आपके शरीर में आयरन और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी पूरी होगी।
5. गरà¥à¤® पानी:
पूरा दिन गरà¥à¤® पानी या गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी का सेवन करें। फà¥à¤°à¤¿à¤œ की ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें!
6. à¤à¥‹à¤œà¤¨ का समय:
बहà¥à¤¤ से लोगो की आदत होती है दिन में थोड़ा-थोड़ा à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाते रहने की लेकिन आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• पहले का खाना जब तक अचà¥à¤›à¥‡ से पच न जाठतब तक दोबारा खाना न खाà¤à¤‚। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का पालन करने से आपका पाचन तंतà¥à¤° सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहेगा।
7. घर के खाने का ही सेवन करें:
हमेशा घर के खाने का ही सेवन करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि घर का खाना पूरी तरह से साफ़ सफाई को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर बनाया जाता है।
8. बाहर के खाने का तà¥à¤¯à¤¾à¤— करें:
बाहर का चाइनीज़, इटैलियन खाना न खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह सब मैदा से बना होता है और मैदा चिपचिपा होता है और आà¤à¤¤à¥‹à¤‚ में चिपकता है।
9. मौसमी फलों का सेवन करें:
à¤à¥‹à¤œà¤¨ में दूध का सेवन ज़रूर करें और तरबूज, खरबूजा, लीची आदि जैसे मौसमी फलों का सेवन करें जिससे आपके शरीर में विटामिन सी की कमी पूरी हो, बेमौसमी फलों को खाने से बचे।
10. घी का सेवन करें:
रोज़ाना सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š घी का सेवन करें जो की आपके पूरे शरीर के लिठलाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है।
नाà¤à¤¿ को तिल, सरसो या नारियल के तेल से पूरण करें जिससे आपका पूरा à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अचà¥à¤›à¥‡ से काम करेगा, तिल तेल की मालिश कर नहायें जिससे आपके शरीर की वायॠनियमित रहेगी। मासिक धरà¥à¤® के दौरान पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ पर तिल तेल की मालिश करे जिससे बहाव ठीक रहेगा। इन सà¤à¥€ नà¥à¤¸à¥à¤–ों का पालन करे और अगर इसके बाद à¤à¥€ आप पीसीओडी/पीसीओà¤à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ नज़र आते है तो अपने नज़दीकी आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें।
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